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ज्योतिष विद्या केन्द्र (Centre for Vedic Astrology)

डॉ. सरित् शर्मा
निदेशक

ज्योतिष विद्या केन्द्र (Centre for Vedic Astrology)

भारतीय ज्योतिष-परम्परा, अध्ययन, अनुसन्धान एवं मार्गदर्शन का समन्वित केन्द्र


आप सभी का इस ज्ञान-केन्द्र में हार्दिक स्वागत है। यह केन्द्र भारतीय ज्योतिष एवं उससे सम्बद्ध पारम्परिक ज्ञान-विधाओं के अध्ययन, शिक्षण, अनुसन्धान एवं परामर्श के लिए समर्पित एक शैक्षणिक एवं ज्ञानपरक प्रयास है। भारतीय ज्ञान-परम्परा में ज्योतिष को वेदाङ्गों में अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। “ज्योतिषामयनं चक्षुः” अर्थात् ज्योतिष समस्त ज्ञान-परम्परा का नेत्रस्वरूप है। इसका सम्बन्ध केवल भविष्य-कथन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह काल-गणना, खगोलीय अध्ययन, पञ्चाङ्ग-निर्माण तथा भारतीय सांस्कृतिक चिन्तन की एक समृद्ध एवं वैज्ञानिक परम्परा का अंग है। हमारा प्रयास है कि इस परम्परा का अध्ययन शास्त्रीय स्रोतों, प्रामाणिक ग्रन्थों एवं व्यवस्थित अध्ययन-पद्धति के माध्यम से किया जाए तथा इसे जिज्ञासु विद्यार्थियों एवं अध्येताओं तक सरल, स्पष्ट और उत्तरदायी रूप में पहुँचाया जाए।

केन्द्र में जन्मकुण्डली अध्ययन, पारम्परिक फलित-ज्योतिष, हस्तरेखा अध्ययन, वास्तु सम्बन्धी मार्गदर्शन तथा ज्योतिष के विविध आयामों पर विद्वानों के सहयोग से कार्य किया जाता है। साथ ही, ज्योतिष के ऐतिहासिक विकास, प्रमुख ग्रन्थों, गणितीय एवं खगोलीय पक्ष तथा भारतीय कालगणना-परम्परा के अध्ययन को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जाता है।

हमारी दृष्टि है कि भारतीय ज्योतिष-परम्परा को उसके शास्त्रीय, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं ज्ञानपरक स्वरूप में समझा और समझाया जाए। “कालः पचति भूतानि” अर्थात् काल ही समस्त सृष्टि का नियामक है, और ज्योतिष उसी काल-तत्त्व का अध्ययन है।

ज्योतिष का अध्ययन केवल अन्धविश्वास या तात्कालिक फलादेश तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे उसके ऐतिहासिक विकास, गणितीय आधार, खगोलीय ज्ञान, कालगणना प्रणाली, एवं भारतीय सांस्कृतिक परम्परा के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

इस केन्द्र का ध्येय एक ऐसा वातावरण विकसित करना है जहाँ—

  • शास्त्रीय ग्रन्थों का गहन अध्ययन हो
  • भारतीय ज्योतिष-परम्परा का व्यवस्थित परिचय मिले
  • विद्यार्थियों एवं जिज्ञासुओं को प्रशिक्षण प्राप्त हो
  • अनुसन्धान एवं अकादमिक अध्ययन को प्रोत्साहन मिले
  • पारम्परिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण हो
  • ज्योतिष के गणितीय एवं खगोलीय पक्ष को समझा जाए
  • तथा परामर्श में विवेक, मर्यादा और उत्तरदायित्व का पालन हो

उपनिषद् कहते हैं— “तमसो मा ज्योतिर्गमय” अर्थात् अज्ञान से ज्ञान की ओर यात्रा ही इस केन्द्र की मूल प्रेरणा है।

प्रमुख सेवाएँ

1. जन्मकुण्डली अध्ययन

जन्मकुण्डली का अध्ययन पारम्परिक शास्त्रीय पद्धति के अनुसार किया जाता है, जिसमें ग्रह, राशि, भाव एवं नक्षत्रों का विवेचन सम्मिलित होता है। यथा “ग्रहाणां चरितं ज्ञात्वा फलं वदति ज्योतिषः” इसका उद्देश्य केवल मार्गदर्शन देना है, न कि किसी के जीवन-निर्णयों का एकमात्र आधार बनना।

2. ज्योतिषीय परामर्श

हमारा परामर्श शास्त्रीय परम्परा पर आधारित होता है, जिसमें –

  • जन्मकुण्डली अध्ययन
  • दशा एवं काल विश्लेषण
  • ग्रह-नक्षत्र सम्बन्धी विवेचन
  • पारम्परिक उपायों की जानकारी
  • सामान्य जीवन-मार्गदर्शन सम्मिलित हैं।

हम विशेष रूप से यह सुनिश्चित करते हैं कि परामर्श में विवेक, संयम और स्वतंत्र निर्णय-क्षमता का सम्मान बना रहे।

3. हस्तरेखा अध्ययन

हस्तरेखा-विज्ञान का अध्ययन पारम्परिक दृष्टि से किया जाता है। यथा शास्त्रीय मान्यता है “कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती” अर्थात् हाथ केवल कर्म का नहीं, बल्कि जीवन-ऊर्जा का भी प्रतीक है।

4. वास्तु सम्बन्धी मार्गदर्शन

वास्तु-शास्त्र के पारम्परिक सिद्धान्तों के आधार पर भवन एवं स्थान-व्यवस्था का अध्ययन किया जाता है। यथा “वास्तुशास्त्रं गृहाणां तु सुखदुःखप्रदायकम्” हमारा प्रयास है कि वास्तु सुझावों को व्यावहारिक, सुरक्षित एवं आधुनिक निर्माण मानकों के साथ संतुलित रूप में प्रस्तुत किया जाए।

अध्ययन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम

यह केन्द्र परामर्श के साथ ही एक शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में भी सेवाएँ देता है।

प्रारम्भिक स्तर
  • ज्योतिष का परिचय
  • भारतीय ज्योतिष का इतिहास
  • राशि, ग्रह एवं नक्षत्र
  • पंचाङ्ग का परिचय
  • भारतीय कालगणना
मध्यवर्ती स्तर
  • जन्मकुण्डली निर्माण एवं अध्ययन
  • ग्रह-भाव सम्बन्ध
  • दशा एवं गोचर अध्ययन
  • फलित-ज्योतिष की मूल अवधारणाएँ
उन्नत स्तर
  • शास्त्रीय ग्रन्थ अध्ययन
  • गणितीय ज्योतिष
  • भारतीय खगोलीय परम्परा
  • तुलनात्मक ज्योतिष अध्ययन
  • अनुसन्धान पद्धति

शास्त्रीय ग्रन्थों का अध्ययन

हमारे केन्द्र में भारतीय ज्योतिष के प्रमुख ग्रन्थों का अध्ययन किया जाता है, जैसे—

  • वेदाङ्ग ज्योतिष
  • बृहत्पाराशर होराशास्त्र
  • बृहत्संहिता
  • फलदीपिका
  • सारावली
  • जातक पारिजात
  • सूर्यसिद्धान्त
  • सिद्धान्तशिरोमणि

“शास्त्रं हि दीपकः प्रोक्तः सर्वविद्याप्रकाशकः” इन ग्रन्थों को फलादेश के साथ-साथ भारतीय ज्ञान-परम्परा के ऐतिहासिक एवं बौद्धिक स्रोत के रूप में समझा जाता है। “युक्तियुक्तं वचो ग्राह्यम्” जहाँ आवश्यक हो, परम्परा और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच संवाद को प्रोत्साहित किया जाता है।

यह केन्द्र फलित-ज्योतिष के साथ-साथ एक व्यापक शैक्षणिक प्रयास है जो परम्परा, ग्रन्थ, अध्ययन, अनुसन्धान और आधुनिक विमर्श को एक साथ जोड़ता है। भारतीय ज्योतिष-परम्परा हमारी ज्ञान-यात्रा का एक अत्यन्त महत्वपूर्ण अध्याय है। जो “ऋतं च सत्यं चाभीद्धात्तपसोऽध्यजायत” से आरम्भ होती है। इसका अध्ययन हमें ग्रह-नक्षत्रों की जानकारी देता है तथा हमें काल-दृष्टि, गणना-पद्धति, खगोलीय जिज्ञासा और सांस्कृतिक चेतना से भी जोड़ता है।

मैं सभी विद्यार्थियों एवं जिज्ञासुओं से आग्रह करता हूँ कि इस परम्परा को श्रद्धा के साथ, अध्ययन के साथ, तर्क के साथ और विवेक के साथ समझने का प्रयास करें।