शिक्षा को जीवन से, ज्ञान को संस्कार से और कौशल को सेवा एवं समाजोपयोगिता से जोड़ने का संकल्प।
अध्ययन केन्द्र का उद्देश्य शिक्षा को केवल परीक्षा और रोजगार तक सीमित न रखकर उसे ज्ञान, संस्कार, कौशल, व्यक्तित्व-विकास एवं जीवन-निर्माण से जोड़ना है। केन्द्र विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभ्यर्थियों एवं आजीवन शिक्षार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण, जीवनोपयोगी एवं मूल्यपरक शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के लिए समर्पित है।
केन्द्र के अन्तर्गत हिन्दी-सुता अध्ययन केन्द्र, वेदवाणी संस्कृत अकादमी, आधुनिक विद्या केन्द्र, विभिन्न प्रशिक्षण एवं कौशल-विकास कार्यक्रम तथा कैरियर काउन्सिलिंग सेवाएँ संचालित की जाती हैं। भारतीय भाषाओं, संस्कृत, आधुनिक विषयों, डिजिटल एवं व्यावसायिक कौशलों के साथ-साथ व्यक्तित्व-विकास और जीवन-मूल्यों पर भी विशेष बल दिया जाता है।
केन्द्र का विशेष प्रयास है कि शिक्षार्थी ज्ञानवान् होने के साथ संस्कारित, कुशल, आत्मनिर्भर एवं उत्तरदायी भी बने। शिक्षा को जीवन से जोड़ते हुए यहाँ “क्या पढ़ें” के साथ-साथ “क्यों पढ़ें” और “सीखे हुए ज्ञान का जीवन में कैसे उपयोग करें” पर भी बल दिया जाता है।
शास्त्र एवं पुराण कहते हैं “सा विद्या या विमुक्तये।” अर्थात् वही विद्या है जो मनुष्य को अज्ञान, संकीर्णता और बन्धनों से मुक्त कर व्यापक जीवन-दृष्टि प्रदान करे।
“शिक्षा, संस्कार, परम्परा, कौशल, रोजगार इनका समन्वय ही सम्पूर्ण जीवन-निर्माण है।” हमारा प्रयास है कि प्रत्येक शिक्षार्थी में जिज्ञासा, चिन्तन, सर्जनशीलता, आत्मविश्वास, नैतिकता और उत्तरदायित्व का विकास हो। अध्ययन केन्द्र इसी संकल्प के साथ शिक्षा को जीवन से, ज्ञान को संस्कार से और कौशल को सेवा एवं समाजोपयोगिता से जोड़ने की दिशा में सतत् प्रयत्नशील है।