सामाजिक सेवा संस्था की मूल प्रेरणा और कार्य-दृष्टि का प्रमुख आधार है। संस्था का विश्वास है कि शिक्षा, संस्कार और सेवा के समन्वय से ही एक संवेदनशील, समतामूलक एवं सशक्त समाज का निर्माण संभव है। इसी भावना से विभिन्न सामाजिक एवं राष्ट्रीय अवसरों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता जागरूकता, वृक्षारोपण, रक्तदान, शिक्षा-सहयोग, राहत एवं सहायता कार्य तथा जरूरतमंद एवं वंचित वर्गों के लिए विविध सेवा-परियोजनाएँ संचालित की जाती हैं।
संस्था विशेष रूप से बालक, विद्यार्थी, युवा, महिला, वरिष्ठजन, आर्थिक रूप से कमजोर एवं आवश्यकता-ग्रस्त परिवारों के लिए उपलब्ध संसाधनों के अनुसार सहयोग एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों को प्रोत्साहित करती है। सेवा के साथ-साथ समाज में कर्तव्यबोध, सहयोग, करुणा, पर्यावरण-जागरूकता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी इसका प्रमुख उद्देश्य है।
शास्त्रों की मूल अवधारणा को हितोपदेश में कहा गया है “परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः, परोपकाराय वहन्ति नद्याः।” अर्थात् वृक्ष और नदियाँ जिस प्रकार दूसरों के हित के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं, उसी प्रकार मनुष्य का जीवन भी परोपकार एवं लोकमंगल से सार्थक होता है। “सेवा मानवता की पहचान है, सहयोग सामाजिक शक्ति है, और संस्कार सभ्य समाज की आधारशिला हैं।”
अतः हमारा प्रयास होना चाहिए कि सेवा सहायता से आगे बढ़कर स्वावलम्बन, सम्मान, शिक्षा और अवसर का माध्यम बने। सेवा ही संस्कार है, शिक्षा ही शक्ति है, सहयोग ही सामाजिक समरसता है और समाज ही हमारा परिवार है। इसी भावना के साथ संस्था “वसुधैव कुटुम्बकम” के आदर्श को जीवन में उतारते हुए हम एक ऐसे समाज के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, जहाँ प्रत्येक व्यक्ति के प्रति संवेदना, सहयोग और सम्मान की भावना विद्यमान रहे।
निदेशक
संदीप तिवारी