मार्गदर्शनम् पत्रिका संस्था का मासिक प्रकाशन है, जिसमें शिक्षा, संस्कृति, साहित्य, भारतीय ज्ञान-परम्परा, नैतिक मूल्यों, सामाजिक जागरूकता तथा समसामयिक विषयों पर लेख प्रकाशित किए जाते हैं। यह एक ऐसा वैचारिक प्रयास है जिसका उद्देश्य ज्ञान को उसके वास्तविक अर्थ में सरल, प्रामाणिक और जीवन से जुड़ा हुआ ज्ञान समाज तक पहुँचाना है । आज के समय में जब सूचना की गति तीव्र है, परन्तु विचारों की गहराई कम होती जा रही है, तब आवश्यकता ऐसे मंच की है जो केवल सूचनाएँ न दे, अपितु चिन्तन, विवेक और दिशा भी प्रदान करे। ‘मार्गदर्शनम्’ इसी आवश्यकता की पूर्ति का एक विनम्र प्रयास है।
इस पत्रिका का मूल उद्देश्य शिक्षा, संस्कृति, साहित्य, भारतीय ज्ञान-परम्परा, अध्यात्म, भाषा और सामाजिक सरोकारों को एक साथ जोड़कर ऐसा संवाद स्थापित करना है, जो व्यक्ति को जानकार बनाए, उसे अधिक जागरूक और उत्तरदायी नागरिक भी बनाए। वास्तविक अर्थों में शिक्षा जीवन को समझने और उसे बेहतर बनाने की प्रक्रिया है। इसी दृष्टि से ‘मार्गदर्शनम्’ शिक्षा को मूल्य, संस्कृति और जीवन-दृष्टि से जोड़ने का प्रयास करता है।
इस पत्रिका का एक महत्वपूर्ण आधार भारतीय ज्ञान-परम्परा है। हमारा प्रयास है कि इस परम्परा को अतीत की धरोहर के साथ साथ वर्तमान की आवश्यकताओं और भविष्य की संभावनाओं के संदर्भ में भी समझा जाए और प्रस्तुत किया जाए।
यह पत्रिका साहित्य, भाषा, विज्ञान, सामाजिक विषयों और समसामयिक विमर्श को भी स्थान देती है, ताकि पाठक एक समग्र दृष्टि विकसित कर सकें। ‘मार्गदर्शनम्’ का उद्देश्य किसी एक विचारधारा का प्रचार करना नहीं है, अपितु विचारों के स्वस्थ संवाद को प्रोत्साहित करना है। हम मानते हैं कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग संवाद, समझ और ज्ञान से होकर ही जाता है।
यह पत्रिका शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, लेखकों और सामान्य पाठकों सभी के लिए एक साझा मंच है, जहाँ हर कोई सीख भी सकता है और योगदान भी दे सकता है। अन्ततः हमारा प्रयास यही है कि यह पत्रिका पढ़ने के साथ-साथ सोची जाए, समझी जाए और जीवन में उतारी जाए। इसी विश्वास के साथ “मार्गदर्शनम्” ज्ञान, संस्कृति और चेतना के इस यात्रा-पथ पर एक विनम्र सहयात्री के रूप में प्रस्तुत है।